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Tuesday, March 24, 2020

24 मार्च 2020 की 10 बड़ी खबरें Top 10 News

1.CSR के दायरे में आएगी कोरोना महामारी से लड़ाई में खर्च रकम: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण




सार

आईसीएमआर के मुताबिक, देश में कोरोना से संक्रमितों की संख्या 467 पहुंच गई है। कोरोना का ना सिर्फ जनता पर, बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ रहा है। ब्रोकरेज कंपनी यूबीएस इंडिया और फिच रेटिंग्स सहित अन्य एजेंसियों ने भी भारत की GDP वृद्धि का अनुमान घटाया है। इसलिए लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए मोदी सरकार जल्द ही बेलआउट पैकेज का एलान कर सकती है। 

विस्तार

दरअसल, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि, 'देश में कोरोना वायरस के प्रसार को देखते हुए सरकार इसे आपदा घोषित करने का निर्णय ले चुकी है। इसलिए कोरोना से लड़ाई में खर्च हुए फंड को सीएसआर एक्टिविटी के अंतर्गत माना जाएगा।' 

टास्क फोर्स का भी हुआ गठन
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना के कारण अर्थव्यवस्था पर आए संकट को दूर करने के लिए वित्तमंत्री के नेतृत्व में कोविड 19 टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ा है।

मध्य वर्ग, निम्न मध्य वर्ग और गरीबों पर इसका बेहद प्रतिकूल असर पड़ा है। इससे निपटने के लिए इस टास्क फोर्स का गठन किया है। उन्होंने कहा कि यह टास्क फोर्स कोरोना वायरस की वजह से निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का अध्ययन कर रही है। जो सभी स्टेक होल्डर्स से बात कर समय समय पर जरूरी कदम उठाएगा।

जरूरी कदम उठाएंगे सरकार व RBI
मालूम हो कि मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम ने कहा था कि कोरोना वायरस की वजह से बाजार में बैठ रहे ‘डर’ से निपटने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक सभी अनिवार्य कदम उठाएंगे। सुब्रमण्यम ने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों की गिरावट दुनिया के अन्य बाजारों की तुलना में काफी कम है। अगले कुछ सप्ताह में घरेलू बाजार में स्थिरता देखने को मिलेगी क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेत मजबूत बने हुए हैं। मुद्रास्फीति घट रही है, औद्योगिक उत्पादन बढ़ा है और देश के पास पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार है।

2.पीएम मोदी का उद्योग जगत से अनुरोध, घर से काम करने की अनुमति दें और नौकरियों में कटौती न करें

देश में कोरोना वायरस प्रकोप और लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को उद्योग जगह के प्रतिनिधियों एसोचेम, फिक्की, सीआईआई और देश भर के 18 शहरों के स्थानीय चैंबरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की। उन्होंने उद्योग जगत से कहा कि वे कर्मचारियों को घरों से काम करने की अनुमति दें और लोगों को नौकरियों से ना निकालें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब सरकार देश में विकास की गति को तेज करने के लिए काम कर रही थी, तब कोविड-19 के रूप में एक अप्रत्याशित बाधा अर्थव्यवस्था के सामने आ गई। उन्होंने कहा कि महामारी से उत्पन्न चुनौती विश्व युद्धों द्वारा उत्पन्न की गई चुनौतियों की तुलना में भी गंभीर है और इसके प्रसार को रोकने के लिए हमें निरंतर सतर्क रहने की आवश्यकता है।

उन्होंने उनसे कहा कि वे कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दें, जहां भी ऐसा करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा सके। उन्होंने उनसे आह्वान किया कि वे मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाएं और अपने व्यवसायों पर नकारात्मक प्रभाव के बावजूद कार्यबल में कटौती नहीं करें।

पीएम मोदी ने कहा कि यह जरूरी है कि इस समय आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन प्रभावित न हो, और कालाबाजारी और जमाखोरी को रोका जाए। उन्होंने उन्हें कारखानों, कार्यालयों और कार्यस्थलों पर कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए स्वच्छता के महत्व और चिकित्सा सलाह का पालन करने के बारे में याद दिलाया।

पीएम मोदी ने कहा कि अर्थव्यवस्था का आधार विश्वास है। विश्वास के पास एक अद्वितीय मापदंड है, यह मुश्किल या चुनौतीपूर्ण समय में अर्जित या खो गया है। उन्होंने कहा और कहा कि विश्वास के पैरामीटर अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं।

एक बयान में कहा गया कि पीएम ने बातचीत में कहा कि कोरोना के कारण असंगठित क्षेत्र सहित पर्यटन, निर्माण, आतिथ्य और दैनिक जीवन की व्यस्तता जैसे कई क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। आने वाले कुछ समय के लिए अर्थव्यवस्था पर प्रभाव महसूस किया जाएगा।

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया कि वे खतरे से मुकाबला करने के लिए तेजी से कदम उठा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने असंगठित क्षेत्र की जरूरतों पर एक स्वर में बोलने के लिए उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को धन्यवाद दिया और कहा कि यह आर्थिक एकीकरण की एक नई सुबह है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के खिलाफ लड़ाई में सामाजिक दूरी बनाना सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने प्रतिनिधियों से यह भी अनुरोध किया कि वे इस गंभीर मोड़ पर महामारी से संबंधित मानवीय कारणों के लिए अपने सीएसआर फंडिंग का उपयोग करें।

3.हिमाचल में कोरोना वायरस से पहली मौत, टांडा में मरीज ने तोड़ा दम

हिमाचल में कोरोना वायरस से पीड़ित एक तिब्बती नागरिक की मौत हो गई। अमेरिका से लौटे 69 वर्षीय तिब्बती को सोमवार सुबह निजी अस्पताल लाया गया, जहां से कांगड़ा के टांडा स्थित मेडिकल कॉलेज रेफर किया। वहां मरीज ने दम तोड़ा। मरीज की मौत के बाद कोरोना टेस्ट करवाया, जिसमें प्रारंभिक रिपोर्ट में कोरोना से मौत की पुष्टि हुई है।
सीएमओ कांगड़ा गुरदर्शन गुप्ता ने बताया कि अब सैंपल जांच के लिए पुणे भेज दिए हैं। उधर, प्रदेश सरकार ने कांगड़ा जिले के बाद सोमवार से पूरा हिमाचल आगामी आदेशों तक लॉकडाउन कर दिया है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन सदन में यह एलान किया। इसके बाद सरकार ने दोपहर को ही इसकी अधिसूचना जारी कर दी।

 सीएमओ कांगड़ा डॉ. गुरदर्शन गुप्ता ने बताया कि तिब्बती व्यक्ति 15 मार्च को अमेरिका से भारत आया था। 15 से लेकर 21 मार्च तक वह दिल्ली में रिश्तेदारों के यहां रहा और 21 को टैक्सी से मैक्लोडगंज पहुंचा। 22 की रात को तबीयत बिगड़ने पर सोमवार सुबह परिजन उसे बालाजी अस्पताल कांगड़ा लाए, जहां से उसे टांडा रेफर किया गया, लेकिन टांडा में उसने दम तोड़ दिया।

कांगड़ा का निजी अस्पताल लॉकडाउन
वहीं, जिस निजी अस्पताल में तिब्बती मरीज सुबह जांच करवाने गया था, उसे प्रशासन ने दोपहर बाद लॉकडाउन कर दिया है। अस्पताल में सभी प्रकार की आवाजाही को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।  कोरोना के चलते सरकार ने सोमवार को 14 संदिग्ध लोगों के सैंपल जांच के लिए पुणे भेजे हैं। हालांकि हिमाचल मेडिकल कालेज में किए गए इन सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव आई है लेकिन फाइनल रिपोर्ट के लिए इन्हें पुणे भेजा गया है। दो दिन बाद इनकी रिपोर्ट आनी संभावित है। हिमाचल में अब तक 71 लोगों के सैंपल लिए गए हैं, इनमें से दो मामले पॉजिटिव पाए गए जबकि 69 लोगों के सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। मुख्य सचिव स्वास्थ्य आरडी धीमान ने इसकी पुष्टि की है।

क्या कहते हैं अस्पताल के एमडी
उधर, बालाजी अस्पताल के एमडी डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि 69 वर्षीय तिब्बती व्यक्ति सुबह करीब 9:30 बजे अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों को मामला संदिग्ध लगा, इसलिए उन्होंने डीसी और सीएमओ कांगड़ा को जानकारी दी। इसके बाद उसे टांडा भेज दिया गया। व्यक्ति पिछले दो साल से अस्पताल में इलाज करवा रहा था। एहतियात के तौर पर करीब छह लोगों का स्टाफ आइसोलेशन में भेज दिया गया है। अस्पताल में ओपीडी बंद कर दी गई है।

सीएम बोले, विदेश में भी फंसे कुछ लोग, ऐसे लोगों को ला रहे

वहीं, सीएम जयराम ठाकुर ने सोमवार को सदन में जानकारी दी कि प्रदेश में कोरोना वायरस के 57 संदिग्ध मरीजों के टेस्ट किए गए हैं। इनमें 55 निगेटिव पाए गए हैं, जबकि दो पॉजिटिव पाए गए हैं। 1237 ट्रेवल हिस्ट्री वाले लोग थे। इनको आईसोलेट किया गया। 426 लोगों ने 28 दिन पूरे किए। सीएम ने केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करने के लिए सभी दलों का भी धन्यवाद किया।  विदेश में कुछ लोग फंसे हैं, ऐसे लोगों को लाया जा रहा है। इस बारे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का सहयोग लिया जा रहा है।

विधायकों से अपील, अपने-अपने क्षेत्रों में शादियों की धाम रोकें 
मुख्यमंत्री ने विधायकों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में शादियों की धाम रोेकें। धाम बाद में भी हो सकती है। नवरात्रों के दौरान कई शादियों के मुहूर्त भी हैं। ऐसे में शादियां तो नहीं रोकी जा सकती हैं, मगर धाम स्थगित की जा सकती हैं। उन्होंने विधायकों को अपने क्षेत्रों में नजर रखने के निर्देश दिए।

मनमानी करने वालों पर सख्ती, टेस्ट की संख्या बढ़ाएंगे 
सीएम बोले, मनमानी करने वालों पर सख्ती की जा रही है। आईजीएमसी शिमला और टांडा कॉलेज में 80 से 90 टेस्ट हो सकते हैं। जोनल अस्पताल मंडी और सीआरआई कसौली में भी कोरोना टेस्ट की सुविधा शुरू करने का सरकार से आग्रह किया जा रहा है। 

तीन दिन तक बंद रहेंगे सभी सरकारी कार्यालय

कोरोना के प्रकोप को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर जयराम सरकार ने मंगलवार से तीन दिन यानी 26 मार्च तक प्रदेश के सरकारी कार्यालय बंद रखने का एलान किया है। इस दौरान सिर्फ इमरजेंसी सेवा वाले कार्यालय और कर्मचारी अपनी सेवाएं देंगे। यह भी निर्देश हैं कि कर्मचारी अपना स्टेशन न छोड़ें।

जरूरत पर बुलाए जाएंगे कर्मचारी, छुट्टी के दौरान नहीं कटेगा वेतन
सरकार ने सभी नियंत्रण अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जरूरत के अनुसार रोटेशन पर कर्मचारियाें को दफ्तर बुलाएं। रोटेशन के दौरान छुट्टी पर रहने वाले कर्मियों का वेतन नहीं काटा जाएगा। इस संबंध में कार्मिक विभाग ने एक आदेश जारी कर दिया है। सरकार के इस आदेश के बाद दो लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों के अलावा करीब पांच लाख दैनिक भोगी, पार्टटाइम, अनुबंध और आउटसोर्स कर्मियों को लाभ मिलेगा। ब्यूरो

घरों में ही रहेंगे 9 मार्च के बाद विदेश से आए लोग 
आदेश के अनुसार नौ मार्च या उसके बाद विदेश से आए सभी लोगों को सख्ती के साथ घरों में ही रहने को कहा है। ऐसे लोगों को जिला सर्विलांस अफसर या 104 पर कॉल कर अपने आने की सूचना दर्ज करानी होगी। ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई होगी।  

हिमाचल में 800 लोग निगरानी पर

कोरोना प्रभावित देशों से हिमाचल लौटने वाले लोगों की संख्या में दिन-प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। प्रदेश में अभी तक 1491 लोग हिमाचल लौटे हैं। इनमें 800 लोगों को निगरानी पर रखा है, जबकि 474 लोग, जिन्होंने 28 दिन निगरानी का समय पूरा कर लिया है, उन्हें परिवार के लोगों से मिलने की अनुमति दे दी है।

197 लोग हिमाचल से बाहर चले गए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य आरडी धीमान ने कहा कि महामारी को लेकर हिमाचल में अलर्ट किया गया है। बाहरी राज्य के लोगों को हिमाचल में एंट्री नहीं कराई जा रही है। हिमाचल के प्रवेश द्वार सील किए गए हैं। लोगों को एहतियात बरतने को कहा गया है।

4.पाकिस्तानी एयर स्पेस बंद होने से पहले शहबाज शरीफ वापस लौटे

सार

  • बीमार नवाज शरीफ के साथ चार महीने से लंदन में थे शहबाज
  • क्वारेंटाइन भेजे गए शहबाज ने देश में लॉकडाउन की मांग की
  • किसी भी तरह की लापरवाही के लिए इमरान सरकार होगी जिम्मेदार- शरीफ

विस्तार

पाकिस्तान नेशनल एसेंबली में विपक्ष के नेता और पाकिस्तान मुस्लीम लीग (नवाज) के अध्यक्ष शहबाज शरीफ चार महीने के बाद लंदन से इस्लामाबाद लौट आए हैं। कोरोना वायरस (कोविड-19) के बढ़ते खतरे की वजह से पाकिस्तान ने अगले दो हफ्ते के लिए बाहर के देशों से आने वाले विमानों पर रोक लगा दी है। ऐसे में रविवार को इस्लामाबाद पहुंचने के बाद शहबाज शरीफ को भी एहतियाती तौर पर मेडिकल जांच के बाद किसी एकांत जगह में भेज दिया गया है। शहबाज अगले कुछ दिनों तक निजी और सियासी गतिविधियों से भी दूर रहेंगे।
कोरोना वायरस की गंभीर स्थिति को देखते हुए शहबाज़ ने लंदन से आते वक्त एक वीडियो जारी कर अपने समर्थकों से उनका स्वागत करने एयरपोर्ट आने से मना कर दिया था। शहबाज ने कहा कि वो पहले ही वापस आना चाहते थे लेकिन अपने भाई और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बीमारी की वजह से नहीं आ सके। लेकिन जब उन्हें पता चला कि पाकिस्तान सरकार अगले दो हफ्ते के लिए अपना एयर स्पेस बंद करने जा रही है तो नवाज शरीफ की सलाह पर वह वापस लौट आए।

पीएमएल (एन) की प्रवक्ता अज्मा बुखारी ने कहा कि शहबाज एक अनुभवी नेता हैं और चाहते हैं कि पाकिस्तान सरकार देश पर आए इस गंभीर खतरे और पाकिस्तानी जनता की सुरक्षा के लिए सभी विपक्षियों का भी साथ ले और कोरोना वायरस को लेकर उठाए जा रहे कदमों के बारे में होने वाली बैठकों में विपक्षी नेताओं को भी शामिल करे। ऐसे समय में सभी एकसाथ मिलकर इसका मुकाबला कर सकते हैं।

शहबाज़ पिछले 19 नवंबर को नवाज़ शरीफ के साथ लंदन गए थे लेकिन नवाज की बीमारी की गंभीरता और इलाज लंबा चलने की वजह से उन्हें अबतक वहां रुकना पड़ा। जेल में बंद नवाज शरीफ की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए लंदन जाने की इजाजत दी गई थी।

लंदन से शहबाज ने पाकिस्तान सरकार से मांग की थी कि कोरोना की वजह से देश की गंभीर हालत को देखते हुए वहां तत्काल चीन की तरह लॉकडाउन किया जाए और सभी ज़रूरी उपाय युद्ध स्तर पर किए जाएं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी अवाम की हिफाजत करना सरकार का पहला फर्ज है। और अगर इसे लेकर कोई भी  लापरवाही या लॉकडॉउन के फैसले में देरी के लिए पूरी तरह पीएमएल सरकार ज़िम्मेदार होगी।

5.मुश्किल में पाक, कर्ज अदायगी में मांगी छूट, ईरान से प्रतिबंध हटाने की भी मांग


सार

  • कुरैशी ने की जर्मनी से अपील, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी उठाई आवाज़
  • कश्मीर में लॉकडाउन पर भी उठाए सवाल, कश्मीरी लोगों की मुश्किलों का दिया हवाला

विस्तार

विदेशी कर्जे में डूबे पाकिस्तान ने कहा है कि उन देशों को कर्ज चुकाने में रियायत मिलनी चाहिए जो कोरोना के खतरनाक संकट से जूझ रहे हैं। पाकिस्तान के  विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने जर्मनी के विदेश मंत्री हाइको मास के साथ फोन पर बात करते हुए ये प्रस्ताव रखा और आग्रह किया कि ऐसे मुश्किल समय में पाकिस्तान को कर्ज चुकाने में राहत मिलनी चाहिए। कुरैशी ने ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध को भी ऐसे मुश्किल वक्त में तत्काल हटाए जाने की मांग की है। पाकिस्तान का कहना है कि कोरोना से इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा प्रभावित ईरान है और आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से वह इससे जूझने में कामयाब नहीं हो पा रहा है। ईरान में कोरोना से अब तक 1550 से ज्यादा लोगों का जान जा चुकी है।
 
कुरैशी ने जर्मन विदेश मंत्री से बातचीत के दौरान इस खतरनाक महामारी की वजह से भारत समेत तमाम देशों में हो रहे लॉकडाउन, सीमाओं की सील किए जाने और कश्मीर में बिगड़ते हालात जैसे मामलों पर भी चर्चा हुई।

कुरैशी ने जर्मन विदेशमंत्री से कहा कि दुनिया भर में आया यह भयानक संकट सभी देशों के लिए एक गंभीर चुनौती है और इसका मुकाबला आपसी सहयोग से ही किया जा सकता है। जर्मन विदेश मंत्री ने इस मामले को जी-7 की आगामी बैठक में उठाने का भरोसा दिलाया और कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर देशों को कर्ज वापसी में छूट देने और ईरान पर प्रतिबंध के बारे में भी वो बात करेंगे। उन्होंने ये मसला अगले हफ्ते होने वाले यूरोपीय विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में भी उठाने की बात कही।

पाकिस्तान किसी भी मंच पर और किसी भी मौके पर कश्मीर का मसला उठाने से भी नहीं चूकता। कोरोना वायरस के खतरे के बारे में बातचीत के दौरान भी जर्मन विदेश मंत्री से कुरैशी ने कश्मीर का रोना रोया। उन्होंने कहा कि पिछले आठ महीनों से कश्मीर की हालतबेहद खराब है औरइस संकट की घड़ी में वहां लॉकडाउन करने से भी स्थानीय लोगों की मुश्किलें और गंभीर हो गई हैं। कुरैशी के मुताबिक अब तक कश्मीर से कोरोना के चार मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 3611 मामलों पर नज़र रखी जा रही है। कश्मीर में 2600 लोगों को क्वारेंटाइन में भी रखा गया है।

कोरोना प्रभावित देशों में ईरान को इस क्षेत्र का सबसे ज्यादा प्रभावित देश बताते हुए कुरैशी ने जोर देकर कहा कि ऐसे वक्त में ईरान पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाया जाना चाहिए। कुरैशी ने एक अलग बयान जारी कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों से भी मानवीयता के आधार पर इस मुश्किल वक्त में ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध तत्काल हटाए जाने की मांग की है। उन्होंने सभी स्थाई सदस्य देशों के राजदूतों से आग्रह किया है कि वो प्रधानमंत्री इमरान खान का यह संदेश अपने देशों तक पहुंचा दें और ईरान की मदद करें। इस वक्त ईरान को तत्काल मेडिकल सहायता की सख्त जरूरत है।

ईरान के राष्ट्रपति रुहानी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और दूसरे देशों के नेताओं को पत्र लिखकर कोविड-19 के इस खतरनाक हमले से बचने के लिए तत्काल अमेरिका की ओर से लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध को हटाए जाने की मांग की और मदद की अपील की है। इस बारे में ईरानी विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने भी कुरैशी से बात की है।

जाहिर है पाकिस्तान ने ईरान पर प्रतिबंध हटाने के साथ ही जिस तरह कर्ज अदायगी में रियायत मांगने की बात की है, उससे साफ है कि वह आने वाले वक्त में कोरोना के नाम पर विश्व बैंक और एडीबी से मिलने वाले कर्ज को चुकाने को लेकर भी राहत और बाद में कर्जमाफी की मांग कर सकता है।

6.कोरोना के मरीजों की देखभाल करने वालों के लिए 'संजीवनी' बन सकती है ये दवा

पूरे देश में कोरोना वायरस को लेकर डर का माहौल है। देश के कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लॉकडाउन की वजह से लोग बिना किसी कारण घर से बाहर निकलने से बच रहे है, लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग हैं, जो जानबूझकर घरों से बाहर निकल रहे है। वहीं, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने बताया है कि मरीजों को कोरोना से उपचार के लिए मलेरिया में इस्तेमाल होने वाली दवा क्लोरोक्वीन को दिया जाएगा। 


देश में कोरोना वायरस के हालात को लेकर सोमवार को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक बलराम राघव और स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने संवाददाता सम्मेलन किया। बलराम राघव ने बताया कि भारत में कोरोना वायरस के हाई-रिस्क वाले मामलों में इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन इस्तेमाल की जा सकती है। 

आईसीएमआर की ओर से कोरोना वायरस के लिए बनाई गई नेशनल टास्क फोर्स ने यह सुझाव दिया है। यह दवा मुख्य रूप से मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होती है। साथ ही आईसीएमआर ने एडवायजरी जारी की है। जिसके मुताबिक, ये दवा उन चिकित्सा कर्मियों को दी जा सकती है जो संदिग्ध या पुष्टि हो चुके कोरोना मरीजों की सेवा में लगे हैं। इसके अलावा प्रयोगशालाओं में संक्रमित मरीजों के घरवालों को भी यह दवा देने की सलाह दी गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसी दवा का नाम सुझाया था।

राघव ने बताया कि आईसीएमआर-एनआईवी पुणे में किट निर्माण की प्रक्रिया को तेज किया गया है। दो किट निर्माता पहले से ही स्वीकृत हैं। मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि एफडीए/ सीई अनुमोदन अनिवार्य नहीं है। आईसीएमआर-एनआईवी अनुमोदित परीक्षण जो फास्ट-ट्रैक आधार पर वहां किए जाएंगे, कोरोना वायरस परीक्षण के लिए भी स्वीकार्य होंगे।

उन्होंने बताया कि 12 प्रयोगशाला पंजीकृत की गई हैं और उन्होंने काम करना शुरू कर दिया है। इन 12 के देश भर में 15,000 संग्रह केंद्र हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि देश में अभी तक कोरोना वायरस के 415 लोग संक्रमित है, 23 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दी गई है और सात लोगों की इस वायरस से मौत हुई है। 

अग्रवाल ने बताया कि 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लॉकडाउन की घोषणा की गई है। छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों को लॉकडाउन के तहत रखा गया है। उन्होंने कहा कि राज्य/केंद्रशासित प्रदेश जिन्हें लॉकडाउन किया गया है, उसमें चंडीगढ़, दिल्ली, गोवा, जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, राजस्थान, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, लद्दाख, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, त्रिपुरा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश शामिल है।

7.मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री पद संभालते ही एक्शन मोड में आए शिवराज, कोरोना पर की उच्च-स्तरीय बैठक

शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालते ही एक्शन मोड में आ गए। उन्होंने सबसे पहले कोरोना वायरस (COVID19) के मद्देनजर वल्लभ भवन में प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों एवं केन्द्र से आए उच्च अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की और इससे निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए दिशा- निर्देश दिए। जानकारी के मुताबिक शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री चौहान मंत्रालय पहुंचे और पूजा-अर्चना भी की।


पहली प्राथमिकता कोविड-19 से निपटना
हालांकि इससे पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही शिवराज सिंह चौहान ने अपना पहला ट्वीट किया। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि आप की शुभकामनाओं के लिए हृदय की गहराइयों से धन्यवाद। मेरी सबसे पहली प्राथमिकता #कोविड-19 से मुकाबला है। बाकी सब बाद में...।


इससे पहले उन्होंने सोमवार को चौथी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल लाल जी टंडन ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई। शिवराज सिंह इससे पहले साल 2005 से 2018 तक मुख्यमंत्री रहे। वे लगातार तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं।

8.दिल्ली में धारा 144 के दौरान जरूरी कार्यों में लगे लोगों के लिए जारी होंगे पास, यहां करें आवेदन

सार

- एनसीआर में काम करने वालों के लिए यह सुविधा
- धारा 144 को सख्ती से कराया जाएगा पालन
- पुलिस ने लोगों को घरों से न निकलने की दी हिदायत

विस्तार

पुलिस ने लॉक डाउन में जरूरी व विशेष कार्यों से जुड़े लोगों के लिए कर्फ्यू पास का एलान किया है। इस पास के लिए आवेदन वह लोग ही कर सकते हैं जो जरूरी सेवा कार्य से जुड़े हुए हैं। उनके लिए पुलिस ने अपने सभी डीसीपी ऑफिस में पास बनवाने की सुविधा दी है। इस पास के बिना अगर सड़कों पर घूमता नजर आयेगा तो उस पर मुकदमा दर्ज होगा। कर्फ्यू पास बनवाने की सुविधा एनसीआर में काम करने वाले लोगों के लिए ही है। बाकी दूसरे जिलों के लिए लॉकडाउन के तहत प्रतिबंध है।
दक्षिणी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त देवेश श्रीवास्तव ने बताया कि धारा 144 व लॉक डाउन लागू होने के बाद भी आम जनता घरों से निकल रही है। ऐसे में जरूरी वस्तु व कार्य से जुड़े लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ रही हैै। इसलिए एनसीआर के जिलों में रोजाना आने-जाने वालों के लिए कर्फ्यू पास की सुविधा दी गई है। यह पास उन लोगों को ही प्रदान किया जायेगा जो जरूरी कार्य से जुड़े संस्था का परिचय पत्र दिखायेंगे। इसके अलावा दूसरे किसी को भी घरों से बाहर निकलने की मनाही है। इस दौरान अस्पताल, मीडिया और बिजली विभाग से जुड़े लोगों को छूट दी गई थी।

इन डीसीपी ऑफिस से मिलेगा कर्फ्यू पास
जिले                          दिल्ली पुलिस का जिला ऑफिस
गुरुग्राम/मानेसर           दक्षिण-पश्चिम डीसीपी ऑफिस, नेल्सन मंडेला मार्ग, वसंत विहार, नई दिल्ली          
फरीदाबाद                  दक्षिण-पूर्वी डीसीपी ऑफिस, सरिता विहार, नई दिल्ली
गाजियाबाद                 शाहदरा डीसीपी ऑफिस, शालीमार पार्क, भोलानाथ नगर
नोएडा                       पूर्वी दिल्ली डीसीपी ऑफिस, आईपी एक्सटेेंशन मंडावली फाजलपुर
सोनीपत                     बाहरी उत्तरी दिल्ली, डीसीपी ऑफिस, थाना समयपुर बादली
बहादुर गढ़ /झज्जर      बाहरी दिल्ली डीसीपी ऑफिस, गुरु हरिकृष्ण मार्ग पुष्पांजलि एंक्लेव पीतमपुरा

9.राहत: समय पर मिलेगी मार्च की पेंशन, कोरोना के चलते नहीं होगी देरी


सार

भारत में लाखों लोग पेंशन पर निर्भर हैं। लेकिन कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए कई लोग चिंतित हैं कि उन्हें पेंशन समय पर मिलेगी या नहीं। इसके मद्देनजर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ( EPFO ) ने सोमवार को निर्देश जारी किए हैं।

विस्तार

ईपीएफओ ने कहा है कि उसने कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए ईपीएस ( कर्मचारी पेंशन योजना ) के तहत आने वाले 65 लाख पेंशनभोगियों को समय पर मासिक पेंशन का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
25 मार्च तक पेंशन अमाउंट स्टेटमेंट्स तैयार करने के निर्देश
मालूम हो कि ईपीएफओ हर महीने ईपीएस के तहत 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को पेंशन का भुगतान करता है। ऐसे में इन सभी के लिए यह राहत भरी खबर है। कोरोना वायरस महामारी के कारण देश के 30 राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों के 548 जिले बंद हैं। इस संदर्भ में श्रम मंत्रालय ने बयान में कहा कि, 'विभिन्न भागों में बंद (लॉकडाउन) की घोषणा की गयी है। मौजूदा स्थिति में पेंशनभोगियों को किसी प्रकार की समस्या नहीं हो, इसके लिए केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (सीपीएफसी) ने ईपीएफओ के 120 क्षेत्रीय कार्यालयों को पेंशनभोगियों के ब्योरे और पेंशन राशि 25 मार्च 2020 तक मिलान करने और सृजन करने को कहा है।'

समय पर पेंशन मिलने के इंतजाम
सीपीएफसी ने यह भी कहा है कि पेंशन बैंकों को पहले ही भेजी जानी चाहिए ताकि पेंशनभागियों की मासिक पेंशन समय पर भुगतान हो सके। ईपीएफओ ईपीएस के अलावा कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी डिपोजिट लिंक्ड बीमा योजना का संचालन करता है। इसके अंशधारकों की संख्या 6 करोड़ से अधिक है जिन्हें भविष्य निधि, समूह बीमा और पेंशन का लाभ मिलता है।

देश में ऐसी है स्थिति
मालूम हो कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के मुताबिक भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 471 हो गई है। केरल में आंकड़ा 100 के करीब है और अब तक देश में कोरोना से कुल 9 लोगों की मौत हुई है। श्रम मंत्रालय ने अपील की है कि कंपनियां कर्मचारियों का वेतन न काटें। साथ ही पीएम मोदी ने मीडियाकर्मियों को सराहा। केंद्र ने राज्य सरकारों से कहा है कि नियम तोड़ने पर की सख्त कार्रवाई की जाए।

10.यूपी का जौनपुर जिला भी लॉकडाउन, कुल 17 जिले हुए, पूरे प्रदेश को लॉकडाउन करने की तैयारी में सरकार

यूपी सरकार ने जौनपुर जिले को भी लॉकडाउन घोषित कर दिया है। इसके साथ ही लॉकडाउन जिलों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। बता दें कि जौनपुर में कोरोना मरीज मिलने के बाद सरकार ने ये फैसला लिया है। इसके अलावा, पूरे यूपी को लॉक डाउन करने की तैयारी की जा रही है। जल्द ही शासन स्तर पर इस पर निर्णय किया जा सकता है। पिछले तीन दिनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगभग 20 अलग-अलग ट्रेनों से लोग आए हैं। ये उन प्रदेशों से आए हैं, जहां सबसे अधिक प्रकोप है। ऐसे में पुलिस महकमे ने पूरे प्रदेश में लॉक डाउन लागू करने की सलाह शासन को दी है।
रविवार को प्रदेश के 16 जिलों में लॉक डाउन की घोषणा की गई थी। इनमें लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, आगरा, बरेली, मेरठ, मुरादाबाद, अलीगढ़, सहारनपुर, आजमगढ़, गाजियाबाद, नोएडा, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत शामिल हैं। अब जौनपुर भी इस सूची में शामिल हो गया है। सूत्रों के अनुसार पिछले तीन दिनों में जो ट्रेनें प्रदेश के विभिन्न जिलों में खासकर गुजरात और महाराष्ट्र से आई हैं, उनमें बड़ी संख्या में लोग आए हैं।

ऐसे लोगों की न तो थर्मल चेकिंग हुई और न ही किसी को क्वारंटीरन किया गया है। इनमें सबसे अधिक लोग गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, बाराबंकी, कुशीनगर, भदोही, मिर्जापुर, बलिया और गाजीपुर जैसे जिलों में आए हैं। इन जिलों में फिलहाल लॉक डाउन की घोषणा नहीं की गई है लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए इस पर निर्णय लिया जा सकता है।

प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने इन जिलों में सभी निजी, सरकारी व अर्द्धसरकारी प्रतिष्ठानों, शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन भी बंद रखने के आदेश जारी किए हैं। इस प्रतिबंध से आवश्यक सामग्री आपूर्ति और जरूरी सामानों को लाने और ले जाने वाले वाहनों को मुक्त रखा गया है।

लॉक डाउन के बाद भी लोग घरों से निकले

जानकारी के अनुसार, सोमवार को प्रदेश के लॉक डाउन वाले जिलों में भी बड़ी संख्या में लोग घरों के बाहर निकले। पुलिस द्वारा रोके जाने पर किसी ने मेडिकल इमरजेंसी का हवाला दिया तो किसी ने सब्जी, राशन व अन्य जरूरी सामान लाने की बात कही। ऐसे लोगों को पुलिस भी नहीं रोक पा रही है।

सोमवार दो बजे तक 12 फ्लाइटों का संचालन
सोमवार को लॉक डाउन होने के बाद भी प्रदेश में विभिन्न राज्यों से घरेलू उड़ानों का संचालन जारी है। एयरपोर्ट के प्रवक्ता संजय नारायण ने बताया कि सोमवार दोपहर दो बजे तक 12 विमानों ने लखनऊ से उड़ान भरी और इतनी ही फ्लाइट ने लैंड किया। जनता कर्फ्यू वाले दिन प्रदेश में 26 फ्लाइटों का संचालन किया गया था।




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